बलरामपुर। माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत प्रवक्ता (PGT) और स्नातक शिक्षक (TGT) भर्ती घोटाले ने बड़ा रूप ले लिया है। विजिलेंस जांच में 30 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन कई विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य अब भी कार्रवाई से बाहर हैं, जिससे भेदभाव की आशंका जताई जा रही है।
घोटाले में बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज, बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रेहरा बाजार और मोहनलाल रामलाल इंटर कॉलेज शिवपुरा के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। इन कॉलेजों के शिक्षकों पर फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी पाने का आरोप है। कुछ शिक्षकों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं और एक को जेल भी भेजा जा चुका है, लेकिन संबंधित विद्यालयों के तत्कालीन प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई इन नियुक्तियों में अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन नहीं कराया गया था, बल्कि मैनुअल प्रक्रिया अपनाई गई थी। डीआईओएस कार्यालय के कुछ कर्मचारियों पर भी इन नियुक्तियों को वैध ठहराने और वेतन बहाल कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।
साल 2023 में जांच के बाद 11 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के 18 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। इनमें से सात शिक्षकों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं, जबकि अन्य के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
डीआईओएस कार्यालय के तीन पटल सहायकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिन पर मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यदि जांच गहराई से की जाए, तो कई और प्रबंधक, लिपिक और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
डीआईओएस मृदुला आनंद ने बताया कि सतर्कता अधिष्ठान की रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों पर कार्रवाई की जा रही है। पटल सहायकों के विरुद्ध भी केस दर्ज किए गए हैं और उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
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