Sunday, November 30, 2025
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भारत की पंचवर्षीय योजनाएं: Five Year Plans Theme की पूरी जानकारी

भूमिका और पृष्ठभूमि

भारत की पंचवर्षीय योजनाएं स्वतंत्र भारत के आर्थिक विकास की आधारशिला रही हैं। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी — आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता। 15 अगस्त 1947 को आज़ादी के बाद भारत सरकार ने देश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास के लिए एक सुव्यवस्थित योजना बनाने की आवश्यकता महसूस की। इसी सोच से भारत की पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत हुई, जिनका उद्देश्य था समग्र और संतुलित विकास को सुनिश्चित करना।

पंचवर्षीय योजना का अर्थ है — ऐसी योजना जो पाँच वर्षों की अवधि के लिए बनायी जाती है और जिसका उद्देश्य होता है देश के संसाधनों का सही उपयोग करते हुए सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना। भारत में इस योजना पद्धति की शुरुआत 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना के साथ हुई।

इसका आधार सोवियत संघ की योजना प्रणाली से लिया गया था। योजनाओं का संचालन भारत सरकार के योजना आयोग (Planning Commission) द्वारा किया गया, जिसे 2015 में बदलकर नीति आयोग (NITI Aayog) बना दिया गया।

पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य

हर पंचवर्षीय योजना की अलग प्राथमिकताएं रही हैं, लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य समान रहे:

  1. आर्थिक वृद्धि: कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र में विकास लाना।

  2. सामाजिक न्याय: समाज के सभी वर्गों को विकास के लाभ देना।

  3. गरीबी उन्मूलन: गरीबों को रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।

  4. स्वावलंबन: देश को आत्मनिर्भर बनाना, खासकर कृषि और रक्षा के क्षेत्र में।

  5. संतुलित क्षेत्रीय विकास: सभी राज्यों और क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करना।

    🔹 1. पहली पंचवर्षीय योजना (1951 – 1956)

    • मुख्य उद्देश्य: कृषि, सिंचाई और भूमि सुधार

    • प्राथमिकता: खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना, गरीबी को कम करना

    • मुख्य योजना: भाखड़ा नांगल बांध, सिंचाई परियोजनाएं

    • योजना लागत: ₹2,069 करोड़

    • उपलब्धियाँ:

      • खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी

      • योजना सफल रही, वार्षिक वृद्धि दर लक्ष्य से अधिक रही (3.6% के मुकाबले 3.6%)


    🔹 2. दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956 – 1961)

    • मुख्य उद्देश्य: औद्योगिकीकरण और भारी उद्योगों का विकास

    • मॉडल: महालनोबिस मॉडल

    • उद्योग: इस्पात, कोयला, मशीनरी

    • योजना लागत: ₹4,800 करोड़

    • उपलब्धियाँ:

      • भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में इस्पात संयंत्र स्थापित

      • सार्वजनिक क्षेत्र का विकास

    • समस्या: कृषि क्षेत्र की उपेक्षा


    🔹 3. तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961 – 1966)

    • मुख्य उद्देश्य: आत्मनिर्भरता और रक्षा मजबूती

    • चुनौतियाँ: भारत-चीन युद्ध (1962), भारत-पाक युद्ध (1965), सूखा

    • योजना असफल: खाद्यान्न की कमी, आर्थिक संकट

    • योजना समाप्ति से पहले ही निलंबित कर दी गई

    • उपलब्धि: हरित क्रांति की नींव पड़ी


    🔹 3 साल का वार्षिक योजना काल (1966 – 1969)

    • कारण: तीसरी योजना की असफलता

    • प्रभाव: योजना प्रणाली पर पुनर्विचार, आपात आर्थिक सुधार


    🔹 4. चौथी पंचवर्षीय योजना (1969 – 1974)

    • मुख्य उद्देश्य: विकास के साथ स्थायित्व और आत्मनिर्भरता

    • प्रमुख कार्यक्रम: हरित क्रांति को बल देना, गरीबी हटाओ का नारा

    • चुनौतियाँ: बांग्लादेश युद्ध (1971), तेल संकट

    • सफलता: हरित क्रांति के कारण खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि


    🔹 5. पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974 – 1979)

    • थीम: गरीबी हटाओ, आत्मनिर्भरता

    • मुख्य योजना: 20 सूत्रीय कार्यक्रम

    • घटना: आपातकाल (1975-77), योजना को 1 वर्ष पहले ही समाप्त कर दिया गया (1978 में)

    • उपलब्धि: बिजली उत्पादन, परिवहन में सुधार


    🔹 6. छठी पंचवर्षीय योजना (1980 – 1985)

    • थीम: अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण, गरीबी उन्मूलन

    • प्रमुख योजना: IRDP (Integrated Rural Development Programme)

    • उपलब्धि: ग्रामीण विकास, बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार


    🔹 7. सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985 – 1990)

    • थीम: उत्पादकता में सुधार, सामाजिक न्याय

    • प्रमुख योजना: Jawahar Rozgar Yojana (JRY)

    • उपलब्धि: शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार


    🔹 1990–1992: दो वार्षिक योजनाएं (अस्थायी काल)

    • कारण: राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट

    • घटना: भुगतान संतुलन संकट, IMF से ऋण


    🔹 8. आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992 – 1997)

    • मुख्य विशेषता: आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत

    • प्रमुख नीतियाँ:

      • निजीकरण

      • वैश्वीकरण

      • LPG नीति (Liberalisation, Privatisation, Globalisation)

    • प्रधानमंत्री: पी. वी. नरसिंह राव

    • वित्त मंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह

    • उपलब्धियाँ: आर्थिक विकास दर 6.5%


    🔹 9. नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997 – 2002)

    • थीम: “जनता के लिए विकास”

    • प्राथमिकता: सामाजिक न्याय, रोजगार सृजन

    • उपलब्धियाँ: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, मानव संसाधन पर बल


    🔹 10. दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002 – 2007)

    • लक्ष्य: 8% आर्थिक वृद्धि दर, गरीबी घटाना

    • थीम: “तेज और समावेशी विकास”

    • उपलब्धियाँ:

      • IT क्षेत्र का विकास

      • राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं


    🔹 11. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007 – 2012)


    🔹 12. बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012 – 2017)

    • थीम: “तेज, समावेशी और टिकाऊ विकास”

    • लक्ष्य:

      • 8% की आर्थिक विकास दर

      • गरीबी में 10% की कमी

      • शिक्षा, कौशल विकास और ऊर्जा सुरक्षा

    • प्रमुख विशेषताएं:

      • PPP मॉडल (Public-Private Partnership) को बढ़ावा

      • ऊर्जा, आधारभूत ढांचे में निवेश

    • नोट: यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी

    • निष्कर्ष:

      योजना संख्याअवधिमुख्य उद्देश्यप्रमुख उपलब्धि / समस्या
      11951-1956कृषि विकासखाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि
      21956-1961औद्योगिक विकासभारी उद्योग की नींव
      31961-1966आत्मनिर्भरतायुद्ध व सूखे से बाधा
      41969-1974स्थायित्व, आत्मनिर्भरताहरित क्रांति
      51974-1979गरीबी हटाओ20 सूत्रीय कार्यक्रम
      61980-1985गरीबी उन्मूलनIRDP जैसी योजनाएं
      71985-1990सामाजिक न्यायरोजगार योजनाएं
      81992-1997उदारीकरणLPG नीति की शुरुआत
      91997-2002जनता के लिए विकाससामाजिक योजनाएं
      102002-2007तीव्र विकासIT और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़त
      112007-2012समावेशी विकासशिक्षा, स्वास्थ्य में निवेश
      122012-2017टिकाऊ, समावेशी विकासअंतिम पंचवर्षीय योजना

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