बलरामपुर जिले में 12 साल पुराने एक बहुचर्चित हत्या मामले में गुरुवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा और प्रत्येक पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
मामला 4 सितंबर 2013 का है, जब थाना हरैया क्षेत्र के बेलवा निवासी बिन्देश्वरी प्रसाद तिवारी ने अपने भाई की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बेलवा निवासी राजेन्द्र मौर्या, विजय कुमार मौर्या और लखौरी निवासी फैजान ने मिलकर युवक की हत्या की और शव को गड्ढे में दफना दिया।
पुलिस ने इस मामले में धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत मुकदमा दर्ज किया। उपनिरीक्षक जेपी सिंह यादव ने विस्तृत जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की मॉनिटरिंग अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय की निगरानी में हुई, जबकि प्रभावी पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नवीन तिवारी, मॉनिटरिंग सेल प्रभारी राज कुमार सिंह और थाना हरैया पुलिस टीम ने की।
अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि हत्या जैसा जघन्य अपराध समाज में किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, इसलिए दोषियों को कठोर सजा दी जाती है। अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद और प्रत्येक पर 55 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का संदेश है, बल्कि अपराधियों के लिए भी एक कड़ा सबक साबित होगा।




