बलरामपुर। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को लेकर गहरी चिंता देखने को मिल रही है। कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने आवाज बुलंद की है।
शनिवार को एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल से मुलाकात कर प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को संबोधित ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह आदेश पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए अन्यायपूर्ण है। 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पहले भी टीईटी से छूट दी गई थी, ऐसे में सेवा के अंतिम चरण में कार्यरत उम्रदराज शिक्षकों के लिए यह परीक्षा देना बेहद कठिन होगा।
जिला महामंत्री तुलाराम गिरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा अधिकार अधिनियम और एनसीटीई की गाइडलाइन के विपरीत है। उन्होंने बताया कि इस निर्णय से पूरे देश में करीब 40 लाख और उत्तर प्रदेश में लगभग 4 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे।
वरिष्ठ शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार तत्काल अध्यादेश लाकर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दे। उन्होंने कहा कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब परीक्षा के नाम पर परेशान करना उचित नहीं है।
ज्ञापन देने वालों में प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान, राजेंद्र प्रसाद गुप्त, सुभाष मिश्र, डॉ. उत्तम गुप्त, मसूद अंसारी, रामानुज वर्मा और रितेश अवस्थी शामिल रहे।




